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Showing posts from February, 2018

मुखौटा...!!

मुखौटा...!! "चेहरे पर चेहरा" क्षण में कुछ और दूसरे क्षण में कुछ और ...!! सच कहें तो अपने आप आप में न जाने कितने चेहरे लिए होता है ये "मुखौटा"..!! दुनिया में मुखौटों का इतिहास बहुत पुराना माना जाता है.प्राचीन काल में जगह जगह नाटक का आयोजन होता था और मनोरंजन का एक मात्र साधन भी.इसमें मुखौटों की अहम भूमिका रहती थी,लोकभाषाओं में रासलीला,रामलीला और नौटंकी के रूप में नाटक किए जाते थे,जो कहीं कहीं अब भी प्रचलन में हैं.इन नाट्य उत्सवों में रावण, कुम्भकरण, गणेश, हनुमान जैसे पात्रों का परिचय उनके मुखौटों से ही होता था.मुखौटों के इस्तेमाल की एक ख़ास बात ये भी होती थी की एक कलाकार कई मुखौटों का प्रयोग कर मंच पर एक समय पर अलग-अलग किरदार निभा सकता था. उस समय ''मुखौटे केवल धोखा देने के लिए ही नहीं बल्कि सच्चाई को प्रस्तुत करने के लिए भी लगाए जाते थें,पर आज साधारण जीवन में मुखौटा सिर्फ फ़रेब और धोखे का प्रतीक बन कर रह गया है,कौन राम है और कौन रावन पहचानना भी मुश्किल है,कौन सच्चा कौन झूठा जानना भी कठिन लेकिन यह भी उतना ही सच है कि जीवन में यही मुखौटा हमें यथार्थ में लौटा ला...

मानसिकता

कहते हैं कि ”इंसान" अपने विचारों से निर्मित प्राणी है,वो जैसा सोचता है वैसा बन जाता है.सोच हमारे व्यक्तित्व को चहुँ ओर से प्रभावित करती है.क्षेत्र चाहे कोई भी हो,देश हो,समाज हो,परिवार हो या हमारा आम जीवन,हमारी सोच का हमारी "मानसिकता" पर बहुत असर पड़ता है.।  "मानसिकता" जो हमारे विचारों को दिशा और रूप देती है.! "मानसिकता" लोगों के सोचने का तरीका,लोगों का नजरिया,और उनके संचार एवं संस्कार की संस्कृति.!! या यूँ कहें कि कोई व्यक्ति कैसे खुद को इसमें या किसी और को देखता है या उसका क्या और कौन सा व्यवहार आदर्श माना जाता है.अर्थात्,मानसिकता किसी व्यक्ति या समूह की एक जटिल छवि और उसका व्यक्तिगत परिचय है,आमतौर लोगों की मानसिकता समय समय पर विभिन्न कारकों से प्रभावित होती है.। कभी कभी हमें हमारी सोच हमें या आपको,एक दूसरे की नजरों में इतना नीचे गिरा देती है जहां से उठ पाना संभव नहीं होता खास कर आज जिस तरह से महिलाओं एवं लड़कियों के प्रति आम लोगों का नजरिया देखने को मिलता है चिंतनीये ही नहीं निंदनीय भी है, पर देखा जाये तो हमारा गलत नजरिया ही हमारी गलत सोच और...