मुखौटा...!!
मुखौटा...!! "चेहरे पर चेहरा" क्षण में कुछ और दूसरे क्षण में कुछ और ...!! सच कहें तो अपने आप आप में न जाने कितने चेहरे लिए होता है ये "मुखौटा"..!! दुनिया में मुखौटों का इतिहास बहुत पुराना माना जाता है.प्राचीन काल में जगह जगह नाटक का आयोजन होता था और मनोरंजन का एक मात्र साधन भी.इसमें मुखौटों की अहम भूमिका रहती थी,लोकभाषाओं में रासलीला,रामलीला और नौटंकी के रूप में नाटक किए जाते थे,जो कहीं कहीं अब भी प्रचलन में हैं.इन नाट्य उत्सवों में रावण, कुम्भकरण, गणेश, हनुमान जैसे पात्रों का परिचय उनके मुखौटों से ही होता था.मुखौटों के इस्तेमाल की एक ख़ास बात ये भी होती थी की एक कलाकार कई मुखौटों का प्रयोग कर मंच पर एक समय पर अलग-अलग किरदार निभा सकता था. उस समय ''मुखौटे केवल धोखा देने के लिए ही नहीं बल्कि सच्चाई को प्रस्तुत करने के लिए भी लगाए जाते थें,पर आज साधारण जीवन में मुखौटा सिर्फ फ़रेब और धोखे का प्रतीक बन कर रह गया है,कौन राम है और कौन रावन पहचानना भी मुश्किल है,कौन सच्चा कौन झूठा जानना भी कठिन लेकिन यह भी उतना ही सच है कि जीवन में यही मुखौटा हमें यथार्थ में लौटा ला...