सब चलता है..!! प्रेम,एहसास,मुहब्बत,अनुभव..,बड़े अजीब से शब्द हो गये हैं आजकल,जिनका आज हकीकत से कुछ लेना देना नहीं रहा शायद,आप सभी कहेंगे ये मैं क्या कह रहा हूँ और यही सोच रहे होंगे या तो मैंने अपनी दिमागी शक्ति खो दी है या मुझे इन बातों की समझ नहीं रही पर जो मैं आज आप सभी से कहने या साझा करने जा रहा हूँ,हो सकता है पढकर आप सभी सहमत भी हो और हो सकता है आप सभी में से किसी ने अनुभव भी किया हो.। कहते है प्रेम आँखों में रहता और दिल में पलता है और एहसास को समझता और एहसास को जीता है मगर प्रेम को कहाँ पता चलता है कि हर राह पर,हर बार उसे उसका "प्रेम" ही छलता है.!! जो "प्रेम" कभी सिर्फ "प्रेम" था "एहसास" था,और सबके दिलों में एक अंकुर बन कर बसता था आज वृहद रूप ले चुका है,उसकी सोच, उसकी आकांक्षाएं बड़ी हो गयी है.। जिसके बारे में कहा जाता था कि यह तो बस "एक कोमल एहसास" है जो नुमाया होती है दो रूहों के दरमियाँ" सच कहें तो आज के परिवेश में इसके मायने बदल गये हैं और शायद रुप भी या कह सकते हैं कि आज "प्रेम" सिर्फ आकर्षण म...