नारी...
"नारी" चलो खत्म हुआ एक भ्रम भरा दिन एवं इस भ्रम भरे दिन के साथ खत्म हुआ शाब्दिक प्रताड़ना, शाब्दिक प्रताड़ना इसलिए कि कल दिन भर पुरूष और नारी दोनों ने ही शब्दों के तरह तरह के प्रहार झेले और पुनः फिर सबकुछ,सबलोग अपने अपने स्थान पर आ गयें.। सभी ने बढ़ चढ़कर नारी दिवस मनाया, आपार हर्ष एवं प्रफुल्लित से मनाया गया यह एक दिन का पर्व कल सभी के मन मस्तिष्क एवं सोसल मिडिया पर छाया रहा पर सोचने और मनन करने योग्य प्रश्न यह है कि ऐसा करने से क्या सबकुछ सुधर गया या फिर आगे नहीं होगा.। कल "नारी दिवस" पर बहुत से पोस्ट पढने को मिलें,कई तो ऐसे मानो कल से किसी नारी के साथ कुछ गलत नहीं होने वाला,ऐसा लगा कि एक ही दिन में सब कुछ सुधर गया,और कई ऐसे भी जिसे पढ कर मन प्रफुल्लित हो गया,कोई अबला,कोई शक्ति,कोई सृष्टि,तो कोई ईश्वर की अनुपम कृति और ना जाने क्या क्या नामों से अपने पोस्ट या लेखों में नारी का संबोधन कर रहे थें पर जाने क्यों उनसे भी सिर्फ कोरी भावनाएं मात्र की दुर्गंध आ रही थी,ऐसा नहीं कि जिन्होने लिखा या पोस्ट किया बिना किसी भावना के किया पर मेरा सिर्फ यही कहना है कि,क्या सच ...